मेरे पिता
जब भी देखा मैंने ,हर बार कुछ अलग से लगे पिता
चटक धूप मे पीपल के दरख़्त से लगे पिता
जब भी देखा मैंने,हर बार कुछ अलग से लगे पिता
पढ़ने का मन किया तो अनुभवो की पुस्तक से लगे पिता
जब भी देखा मैंने ,हर बार कुछ अलग से लगे पिता
जब अनुसरण किया तो सदाचार से लगे पिता
जब भी किसी चीज से घबराये हम,द्रण सम्बल से लगे पिता
नींद न खुल जाये गर्मी से कही बीजने से बयार करते दिखे पिता
हमारी परेशानियों मेँ हमसे ज्यादा परेशान दिखे पिता
हमारे चेहरे पर मुस्कुराहट देखनेको,सदा खुशियों का विस्तार करते दिखे पिता
जब भी देखा मैंने ,हर बार कुछ अलग से लगे पिता
चटक धूप मे पीपल के दरख़्त से लगे पिता
जब भी देखा मैंने,हर बार कुछ अलग से लगे पिता
पढ़ने का मन किया तो अनुभवो की पुस्तक से लगे पिता
जब भी देखा मैंने ,हर बार कुछ अलग से लगे पिता
जब अनुसरण किया तो सदाचार से लगे पिता
जब भी किसी चीज से घबराये हम,द्रण सम्बल से लगे पिता
अपने सानिध्य से बड़े बड़े दुःखों को छोटा करते दिखे पिता
मुँह जल न जाए कही गर्म भाप से हमारा ,रोटी के छोटे छोटे टुकड़े करते दिखे पितानींद न खुल जाये गर्मी से कही बीजने से बयार करते दिखे पिता
हमारी परेशानियों मेँ हमसे ज्यादा परेशान दिखे पिता
हमारे चेहरे पर मुस्कुराहट देखनेको,सदा खुशियों का विस्तार करते दिखे पिता
Heart touching poem.
ReplyDelete