हाइकू
जग की रीत
मिलना बिछड़ना
कैसे बचूं मैं
भूलना चाहूँ
पर भुला न पाऊँ
करूँ क्या कहो
दूर फिर भी
संग चलते सदा
ज्यों परछाईं
अंतर्मन के
किसी कोने से
झांकते तुम
नहीं भूलती
सुख दुख बांटना
तुमसे कभी
जग की रीत
मिलना बिछड़ना
कैसे बचूं मैं
भूलना चाहूँ
पर भुला न पाऊँ
करूँ क्या कहो
दूर फिर भी
संग चलते सदा
ज्यों परछाईं
अंतर्मन के
किसी कोने से
झांकते तुम
नहीं भूलती
सुख दुख बांटना
तुमसे कभी